पंजाब में महासंग्राम: अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान को ठहराया 'गुरु का दोषी', बीजेपी-कांग्रेस की इस्तीफे की मांग से गर्माई सियासत

पंजाब में महासंग्राम: अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान को ठहराया 'गुरु का दोषी', बीजेपी-कांग्रेस की इस्तीफे की मांग से गर्माई सियासत

पंजाब की राजनीति में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित मोड़ आ गया है। श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को एक कथित आपत्तिजनक वायरल वीडियो मामले में कसूरवार मानते हुए उन्हें "गुरु का दोषी और पंथ विरोधी" घोषित कर दिया है। इसके साथ ही सिख समुदाय से मुख्यमंत्री का सामाजिक बहिष्कार करने की बड़ी अपील भी की गई है। अकाल तख्त के इस कड़े फैसले के बाद पंजाब के सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर चौतरफा हमला बोलते हुए उनसे तुरंत पद से इस्तीफा देने की मांग कर दी है, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) ने इस जांच रिपोर्ट की सत्यता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरा विवाद मुख्यमंत्री के एक कथित वीडियो से जुड़ा है, जो ईमेल के जरिए अकाल तख्त साहिब को भेजा गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री को तलब किया था, जिसके बाद वे 14 जनवरी को अमृतसर स्थित सचिवालय में पेश भी हुए थे। उस दौरान मुख्यमंत्री मान ने दावा किया था कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है। उन्होंने इसकी किसी भी फॉरेंसिक लैब से जांच कराने की चुनौती दी थी, जिसके बाद अकाल तख्त ने वीडियो को जांच के लिए दो अलग-अलग फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में भेजा था।

5 सिंह साहिबानों की महाबैठक में आया ऐतिहासिक फैसला

अमृतसर के पवित्र स्वर्ण मंदिर (हरिमंदिर साहिब) परिसर में पांच सिंह साहिबानों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने देश-विदेश की सिख संगत के सामने फैसला सुनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्च पीठ के सामने आकर झूठ बोला कि वीडियो AI से तैयार किया गया था, जबकि फॉरेंसिक जांच में सच्चाई कुछ और सामने आई है। जत्थेदार ने कहा कि जो व्यक्ति अकाल तख्त पर आकर असत्य बोल सकता है, उससे सिख पंथ के हितों की रक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती।

पंजाब कैबिनेट और सभी सिख विधायकों को 29 जून का समन

अकाल तख्त साहिब की इस उच्चस्तरीय बैठक में केवल वीडियो विवाद ही नहीं, बल्कि पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए "जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन बिल" पर भी गंभीर चर्चा हुई। अकाल तख्त का मानना है कि इस संवेदनशील कानून को तैयार करने से पहले सिख विद्वानों, बुद्धिजीवियों और धार्मिक संस्थाओं के साथ किसी भी प्रकार का विचार-विमर्श नहीं किया गया। इसी कारण अकाल तख्त ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इस बिल पर हस्ताक्षर करने वाले पंजाब सरकार के सभी सिख विधायकों और पूरी पंजाब कैबिनेट को आगामी 29 जून को अकाल तख्त साहिब में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का कड़ा फरमान सुनाया है।

नैतिक अधिकार खो चुके हैं मुख्यमंत्री: अमरिंदर सिंह राजा वडिंग

अकाल तख्त का फैसला आते ही पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सिख कौम के लिए अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता सर्वोपरि है। जब देश की दो बड़ी फॉरेंसिक लैब्स की जांच के बाद अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री को दोषी पाया है, तो भगवंत मान के पास सत्ता की कुर्सी पर बने रहने का कोई भी नैतिक अधिकार नहीं बचता है। उन्हें तुरंत अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए।

भाजपा ने कहा- सर्वोच्च धार्मिक संस्था के फैसले का हो सम्मान

पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी कांग्रेस सुर में सुर मिलाते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग बुलंद की है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च और सबसे सम्मानित संस्था है। इसके द्वारा लिए गए फैसलों का हर किसी को सम्मान करना चाहिए। चूंकि सूबे के मुख्यमंत्री को धार्मिक रूप से दोषी करार दिया जा चुका है, इसलिए उन्हें नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से हट जाना चाहिए।

आम आदमी पार्टी का पलटवार: 'आप' ने फॉरेंसिक रिपोर्ट पर ही उठाए सवाल

इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) पूरी मजबूती से मुख्यमंत्री भगवंत मान के बचाव में उतर आई है। पार्टी के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अकाल तख्त द्वारा सार्वजनिक की गई रिपोर्ट पर ही सवालिया निशान लगा दिए। बलतेज पन्नू ने कहा कि जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज जो रिपोर्ट सामने रख रहे हैं, अगर हम उसे मान भी लें, तो भी वह रिपोर्ट कहीं से भी यह स्पष्ट नहीं कर पाती है कि उस विवादित वीडियो में दिखने वाला असल व्यक्ति कौन है? उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में इस वीडियो की पूरी सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी और दूध का दूध व पानी का पानी हो जाएगा। फिलहाल इस फैसले ने पंजाब के चुनावी और राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।

 

 

Latest Posts